
ममता अहार के इस सराहनीय कार्य के साथ ही उनकी एक पात्रीय संगीत नाटिका 'मीरा बाई' को क्षेत्र में बहुत अच्छी सराहना मिली है इस कार्यक्रम की लोकप्रियता को देखते हुए छत्तीसगढ़ के विभिन्न नगरों में इसके कई प्रदर्शन हो चुके हैं। डेढ़ घंटे की इस प्रस्तुति में राजवंशीय परिवार की मीराबाई, उसकी मॉं, पिता व मीरा के तीन अहम रूपों की भूमिका को स्वयं ममता के द्वारा निभाना चुनौतीभरा काम रहा है जिसे ममता नें बखूबी निभाया है। अकेले अदाकारी के बूते लगभग दो घंटे दर्शकों को बांधे रखने की क्षमता इस नाटिका में है, एकल पात्रीय इस नाटिका में बचपन की मीरा श्रीकृष्ण की मूर्ति से प्रेम करती है बालसुलभ बातें भी करती है। दुनिया के रीतिरिवाजों से अनजान मीरा को उनके बड़े जो बताते हैं उसे ही सत्य मानकर भक्ति के मार्ग में बढ़ चलती है। इस नाटक में मीरा का प्रभु प्रेम, जीवन संघर्ष, कृष्ण भक्ति में लीन नर्तन व सामाजिक रूढि़वाद के विरूद्ध बाह्य आडंबर, सामाजिक कुरीतियों का विरोध करते हुए मीरा के संर्घष को प्रस्तुत किया गया है। मीराबाई के जीवन के पहलुओं को जीवंत प्रस्तुत करती इस नाटिका की प्रस्तुति दर्शकों में गहरा प्रभाव छोड़ती है। इस नाटिका में संगीत गुणवंत व्यास नें दिया है, एवं नाटिका को स्वयं ममता नें लिखा है और निर्देशित किया है।
कल 30 दिसम्बर को माउन्ट आबू के शरद महोत्सव में ममता का एकल अभिनय 'मीरा बाई' का प्रदर्शन होने जा रहा है समय है संध्या 7 से 9. यदि आप माउंट आबू में हैं तो अवश्य देखें.